सियासत के नाम... ------------------- सब के सब बहरूपिये से हो गए, चंद सिक्कों की ख़नक में,खो गए, दर्द की आवाज़ आख़िर क्यों सुनें ? कान में उँगली घुसा कर सो गए.... उर्मिला माधव... १.3.२०१४ ...
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