लोग कुछ मगरूर जैसे लग रहे थे, खुद ही खुद में,चूर जैसे लग रहे थे वो बहुत मीठी ज़बां सब बोलते थे, थे वहीँ.....पर दूर जैसे लग रहे थे, उर्मिला माधव... 8.2.2014..
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