कैसी ख़ुशियाँ हैं जहाँ बेबसी भी शामिल है, बहुत से अश्क़ हैं थोड़ी हँसी भी हासिल है, हम जिसकी चाह में नींदें ख़राब करते हैं, ये झूठे ख़्वाब ही तो ज़िंदगी के क़ातिल हैं । उर्मिला माधव.. 5.2.2013
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