Sunday, 25 February 2018

देख लेते हैं

उफ़ ये पुरज़ोर, हवाएं,ये आंधियां, ये चराग़,
ज़िंदगी किसकी मुक़म्मल है,....देख लेते हैं,
उर्मिला माधव,
26.2.2017

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