इस दर्द को क्या तशहीर करूँ, किस मुंह से कोई तक़रीर करूँ, ये अब तक है तनक़ीह तलब, किस लमहे को ज़ंजीर करूँ?? उर्मिला माधव... 14.2.2016
No comments:
Post a Comment