न तो ये ज़मीन वाले,ना ही आसमान वाले,
हरग़िज न समझे कोई,कितना भी आज़माले,
हम मर गए जहाँ में,क्या कोई जान पाया?
तो दिल ये उठके बोला,अब ख़ुद क़फ़न उठाले,
ये जो मौत की है मन्ज़िल,ना होश खोने पाए,
ये तेरा जनाज़ा है काँधा भी ख़ुद लगाले ।। Urmila Madhav.
03,02,2013
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