Thursday, 8 February 2018

दुश्मन खड़ा करते हैं हम

आशिक़ी की शक़्ल में ....दुश्मन खड़ा करते हैं हम,
ख़ुद को छोटा करके उसका क़द बड़ा करते हैं हम,
जिसकी चाहत में मुक़ाबिल ...रंजो ग़म का बोझ हो,
सारी दुनियां भूल कर,....ख़ुद से लड़ा करते हैं हम..
उर्मिला माधव,
24.10.2017

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