लोग जो हुस्न-ओ-इश्क़ लिखते हैं, मुझको.......दीवाने जैसे दिखते हैं, सिर्फ़..........शाखें बदलते रहते हैं, पाँव उनके.........कहीं न टिकते हैं. उर्मिला माधव... 22.2.2014...
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