ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 3 April 2026
इल्ज़ाम दे गया
मुझको ज़ुबाँ से जो कई इल्ज़ाम दे गया,
अपने जुनून-ए-इश्क़ का पैगाम दे गया,
मेरा वज़ूद मुझमें कहीं मुसकुरा गया,
मेरी वफ़ा को धीरे से एक नाम दे गया।।
...Urmila Madhav..
4.4.2013
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