Thursday, 2 April 2026

बचने लगी है

अब तो ये हर बात से बचने लगी है,
चलते-चलते ज़िन्दगी थकने लगी है,
जिससे जाहिर होती हों मायूसियाँ,
ऐसे हर जज़्बात को ढकने लगी है।।....
.Urmila Madhav
3.4.2013

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