ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 7 April 2026
ज़ब्त करते हैं
ज़ब्त करते हैं मुसलसल,टूटते जाते हैं हम,
रास्ते रफ़्तार में हैं छूटते जाते हैं हम,
उर्मिला माधव
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