फ़ासले मीलों के हैं और रास्ता कोई नहीं, तेरी बाबत पूछते रहते हैं कुछ पहले के लोग, मेरे लब ख़ामोश रहके देखते रहते हैं बस, वो मुसलसल पूछते हैं,चुप कहाँ रहने के लोग उर्मिला माधव, 9.3.2019
No comments:
Post a Comment