हम ज़िन्दगी पे अब तक क़ुर्बान ही हुए हैं, वा-बस्तगी से दिल की हैरान ही हुए हैं!! अपनी बुलन्दियों पे क़ायम है आज भी हम, रुसवाइयों के कितने सामान भी हुए हैं.! उर्मिला माधव.. 16.3.2013
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