अपनी दुनियाँ में पलट कर देखना मुश्किल हुआ, देखते ही रह गए यूँ क़िस्सा-ए-बिस्मिल हुआ!! दिल की दुनियाँ आज तक भी जैसी थी वैसी रही, जो भी रोना पीटना था बेवजह बिलकुल हुआ।। उर्मिला माधव. 25.3.2013
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