वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है, मेरे हिस्से मैं फ़क़त रुसवाई है दुहाई है, चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा, चांदनी चलके यहाँ तक आई है दुहाई है, उर्मिला माधव... 13.3.2014..
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