Saturday, 9 March 2019

अज़ान

मन्दिर में हो अज़ान हों मस्जिद में घन्टियाँ,
सजदे करेगी राह में हर सिम्त कहकशाँ,
नारे हों बोल बम के जो मस्जिद के सहन में,
बस धुन हो या अली की हर इक जिस्मो ज़ेहन में,
बस एक वतन हो दहर में इन्सान का वतन,
मरने के बाद ओढ़ते हैं सब एकसा क़फ़न।।   ......... उर्मिला माधव.
10.3.2013

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