Wednesday, 6 March 2019

लजाई सखी

कैसी झीनी चुनरिया..उढ़ाई सखी,
तैने सबरी नगरिया...हंसाई सखी,
रंग डारौ सबन्ने जो मिलि कें मोहे,
खूब भीतर ही भीतर लजाई सखी....
उर्मिला माधव...
7.3.2014...

No comments:

Post a Comment