तुम जो चले गए तो बहुत.....खैर हो गयी, कुछ वक़्त मिल गया तो कहीं सैर हो गयी, अब हाल इस तरह है मेरी जीस्त का सुनो, अपनी सी लग रही जो कभी....ग़ैर होगयी.... उर्मिला माधव... 8.3.2014....
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