Thursday, 7 March 2019

कैसे हो

दिल में हुजूमे ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में ...वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुरदार हो चुके हैं ......इबादत के वलवले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ .हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013

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