ख़्वाब हम देखते नहीं हैं अब, जां कहीं और हम कहीं हैं अब, पहले उड़ते थे आसमानों में, ख़ास ये है के बस यहीं हैं अब, उर्मिला माधव ... 6.3.2015....
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