ग़म गुज़ारिश की तरह से आगये, ज़ख्म खारिश की तरह से आगये. फैसला करने की कूव्वत थी किसे, अश्क़ बारिश की तरह से आगये, उर्मिला माधव... 25.3.2016...
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