Sunday, 31 March 2019

जज़्बात हूं

मर्तबा इंसाँ है मेरा और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ,ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक क़िस्सा-ए-हालात हूँ..... Urmila Madhav
22.3.2013

No comments:

Post a Comment