Sunday, 30 September 2018

हाल है

दिल शब्-ए-ग़म से शिक़स्ता हाल है,
ज़िन्दगी कितनी बची है क्या खबर ??....
उर्मिला माधव...
1.10.2014...

बार-बार

कुछ इस तरह लगी कि हुई दिल के आर-पार,
जब ज़ख्म है तो दर्द भी.....होगा ही बार-बार...
उर्मिला माधव...
1.9.2015

चला गया

मैं रास्ते की ख़ाक का हिस्सा बनी रही,
आंखों में धूल झोंक के ,राही चला गया
उर्मिला माधव
1.10.2017

Saturday, 29 September 2018

जाने दो

मौत बस आख़री तमाशा है,
नब्ज़ बाक़ी है छूट जाने दो,
उर्मिला माधव

Friday, 28 September 2018

मिट जाएंगे

बेटियों की खातिर....

दुख्तर-ए-जज़्बात हूँ कुछ उन्सियत रख्खो ज़रा,
वरना इस दुनियां के सारे.....रास्ते मिट जायेंगे.....
उर्मिला माधव....
29.9.2014....

दुख्तर---- बेटी
जज़्बात---भावनाएं
उन्सियत---हमदर्दी

कमाल करते हैं

शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां,
लोग खुल के कमाल करते हैं,
जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है,
उसका बस..इस्तेमाल करते हैं...
उर्मिला माधव,
29.9.2017

हिंदी क़ता--सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

है ज़ुरूर

आपकी सूरत हंसीं तो है .….ज़ुरूर,
उसके ऊपर सिर्फ़ लिख्खा है ग़ुरूर,
इसको पढ़के यूँ समझ लो, जानेमन,
जा चुके हैं उम्र भर को .....तुमसे दूर
उर्मिला माधव

Thursday, 27 September 2018

क्या करता होगा

याद बहुत ही आने वाला,
ना जाने क्या करता होगा,

नौ बज कर सैंतालिस तक तो
मैंने उसको जगते देखा,
उससे ज़्यादा जगने पर फिर,
घर वालों से डरता होगा..

क्या-क्या करता होगा घर में
शायद पढ़ता-लिखता होगा
उसके कपड़े और किताबें,
सब हर रोज़ बिखरता होगा,

या फिर याद किसीको करके
ठंडी आहें भरता होगा
उर्मिला माधव

उठा के ले जाएं

हम तो कुछ देर और बैठेंगे,
आप महफ़िल उठाके लेजाएँ,

हम तो अशआर नज़्र करते हैं
आप बस दिल बचाके ले जाएं

हम तो राही हैं उम्र भर वाले,
आप मंज़िल हटा के ले जाएँ

अब सफ़ीने के पांव जमने लगे,
आप साहिल घुमा के ले जाएं

ख़ून का रंग जम गया है मगर,
आप क़ातिल छुपा के ले जाएं,
उर्मिला माधव

आते रहते हैं

चाहिए कोई भी …..नहीं हमको,
हमतो बस ..दिल लगाते रहते हैं
दिल को तन्हाइयों का ग़म न रहे,
बस तो महफ़िल  में जाते रहते हैं..
उर्मिला माधव,
28.9.2017

Wednesday, 26 September 2018

धोका कर लिया

ग़ैर को ग़म देके उसने दिल तो हलका कर लिया,
ये मगर समझा नहीं के ख़ुद से धोका कर लिया.
उर्मिला माधव

Tuesday, 25 September 2018

पागल हो क्या ?

क्यों दुनियां के मुंह लगते हो,पागल हो क्या ?
उम्मीदें भी तुम रखते हो,पागल हो क्या ?

तपिश जानता न था

पैमाना मेरी उम्र का ...........वो नापता रहा,
जो ज़िन्दगी के ग़म की तपिश जानता न था..
उर्मिला माधव..
23.9.2017

Monday, 24 September 2018

सोते रह गए

सब यहीे समझे ......के सोते रह गए,
हम मगर ......तकिये भिगोते रह गए,
दिल जिगर पै इतने ज़्यादः ज़ख्म थे,
ख़ून के धब्बे ही ..........धोते रह गए..
#उर्मिलामाधव
25.9.2015

ढेर करदी

Ye samajhne men kitni der kardi,
Zindagi kude pe hamne dher kardi
ये समझने में कितनी देर कर दी,
ज़िंदगी कूड़े पे हमने ढेर कर दी,
उर्मिला माधव

जला के हम

फ़रोज़ां कर रहे थे ज़िन्दगी को,खूँ जला के हम
मगर तुमसे कहाँ ये रौशनी ........देखी गई मेरी
उर्मिला माधव
23.9.2017

Saturday, 22 September 2018

कोफ़्त होती है

मेरे ख्वाबो ख़यालो,तुम मुझे कुछ होश में लाओ,
फ़क़त दीवानगी,दीवानगी से .....कोफ़्त होती है...
#उर्मिलामाधव..

चाहते हैं

ज़ीस्त से मुंह मोड़ लेना चाहते हैं,
अपना ही दिल तोड़ लेना चाहते हैं,
हर दिमाग़ी दर्द से दामन बचा कर,
खुद को खुद से जोड़ लेना चाहते हैं.....
उर्मिला माधव...
23.9.2014...

Friday, 21 September 2018

तनहा सफ़र

बिन दर-ओ-दीवार का घर,उसपै ये दुनियां का डर,
हर तरफ शोलों की बारिश और मेरा तनहा सफ़र,

साथ कोई हो भी ग़र तो उसके क्या मानी हुए ?
क़ुदरतन ही बंट गये ये मेरा घर ये उसका घर,
उर्मिला माधव
22.9.2015

ठीक तो है

ख़्वाब आते हैं ? बात ठीक तो है,दिल के बहलाने को तरकीब तो है..
दर्द ही दर्द है मुहब्बत में,ग़म नहीं,दिल के कुछ करीब तो है
उर्मिला माधव

कोफ़्त होती है

मेरे ख्वाबो ख़यालो,तुम मुझे कुछ होश में लाओ,
फ़क़त दीवानगी,दीवानगी से कोफ़्त होती है...
#उर्मिलामाधव..

कोफ़्त होती है

मेरे ख्वाबो ख़यालो,तुम मुझे कुछ होश में लाओ,
फ़क़त दीवानगी,दीवानगी से कोफ़्त होती है...
#उर्मिलामाधव..

Thursday, 20 September 2018

आती नहीं है

Raat bhi hai bebhaya jati nahi hai
Sahar kitni be wafa aati nahin hai

रात भी है बेहया, जाती नहीं है,
सहर कितनी बेवफ़ा आती नहीं है,
उर्मिला माधव

मतला

एक मतला------

अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में कितने सारे ख़म रहे,
हमने बस इतना किया...के मुस्कुराते हम रहे,
उर्मिला माधव...
21.9.2014...

अंदाज़ नहीं ला सकते

लोग फितरत से कभी बाज़ नहीं आ सकते,
सोज़ की तरहा कोई ..साज़ नहीं ला सकते ,
जो कभी खुद में कोई ख़ास मुक़म्मल न रहे,
टूटते दिल में वो .....आवाज़ नहीं ला सकते...
उर्मिलामाधव...
21.9.2015

हाज़री भरदी

एक छोटा सा फैसला लेकर,
ख़ुदकुशी हमने मुल्तवी करदी,
सांस जब तक है,जीते जाना है
ऑ रजिस्टर में हाज़री भरदी..
उर्मिला माधव,
21.9.2017

मोतबर

ज़िन्दगी कब-कब रही है मोतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर

ये तो कारीगर की ही मर्ज़ी है बस,
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव

Wednesday, 19 September 2018

क़ब्रिस्तान

दिल सुलगता है धुंआ है,और बहुत तूफ़ान है,
आज मेरी रूह से......उलझा ये क़ब्रिस्तान है,
देखना है कौन कितनी....देर तक रह पायेगा,
आखिरी लम्हा कहेगा किसमें कितनी जान है..!!
उर्मिला माधव...
20.9.2015

तर्जुमा है

इक हुजूमे दुश्मनां जिसमें निहां है,
ज़िंदगी ....जद्दोजहद की तर्जुमा है.
उर्मिला माधव
20.9.2017

Tuesday, 18 September 2018

नादान सब

बात करते हैं सियासत की.....यहाँ इन्सान सब,
अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,कितने हैं बेईमान सब,
सबकी बातों में सियासत,और घातों में सियासत,
बस अकेले वो हैं वाइज़.....बाकी हैं नादान सब
उर्मिला माधव...
१९.९.२०१३

कुट्टी पे हैं

साहिबे आलम जी क्या छुट्टी पे हैं ?
हमतो समझे थे के बस कुट्टी पे हैं... :)
उर्मिला माधव...
19.9.2016

दस्तरस में है

मैं सोचती थी वो तो मेरी दस्तरस मे है
ग़ैरों में उसको देख के धड़कन ठहर गई...
19.9.2017

कौन पूछे

कौन पूछे किसीका हाल यहां,
सब तो अपनी दुहाई देते हैं,
खुलती है,जब भी आंख मुश्किल से
तंज़ गहरे सुनाई देते हैं...
उर्मिला माधव,
19.9.2017

ज़ाया करोगे

ज़िन्दगी भी .अब मुसलसल पूछती है,
और कितना मुझको तुम ज़ाया करोगे...?
उर्मिला माधव..
18.9.2016

लग रही है

हर सतह अब ...खुरदुरी सी लग रही है,
सच समझ कर .झुरझुरी सी लग रही है,
अब धसक जाने का डर है ज़िन्दगी को,
ख़ास मिट्टी ......भुरभुरी सी लग रही है....
उर्मिला माधव...
18.9.2017

Saturday, 15 September 2018

बढ़ाकर

एक बुत को शक्ल दी औक़ात से उसकी बढाकर,
उस ने दुनियाँ तोल दी औक़ात की धज्जी उड़ाकर....
उर्मिला माधव...
16.9.2014

उदास छोड़ दिया..

ख़ुद को बिल्कुल उदास छोड़ दिया,
दिल भी उसके ही पास छोड़ दिया,
अब शिकायत भी उससे कौन करे,
जिस ने उल्फ़त का पास छोड़ दिया...
उर्मिला माधव,
14.9.2018

Friday, 14 September 2018

तबस्सुम के लिए

इक तबस्सुम के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं लोग,
अश्क़ उसके देख कर ..दिल देर तक रोया किया...
::
Ik tabassum ke liye kya-kya nahi karte hain log,
ashq uske dekh kar ..........dil der tak roya kiya
#उर्मिलामाधव
15.9.2015

सीता कहा

आग में ज़िंदा भुने,......तब आपने सीता कहा,
आपको ये फैसला करने का हक़ किसने दिया ?
🤔
उर्मिला माधव,
15.9.2017

दूर दूर से

लो बेचारे मर गए दब कर ग़ुरूर से,
सब कर गए सलाम उन्हें दूर दूर से...
उर्मिला माधव...
15.9.2016

प्यार नहीं है

जो हंस के मिल रहे हैं उन्हें प्यार नहीं है,
कोई भी उलझनों का ख़रीदार नहीं है..
उर्मिला माधव

Thursday, 13 September 2018

ताबूत में

इस क़दर ठोकी गईं .....कीलें मेरे ताबूत में,
बाद मरने के ये जाना,दुख्तर-ए-ईसा थी में...
उर्मिला माधव.
14.9.2016

Wednesday, 12 September 2018

छोड़ कर आते

जुबां शीरीं जो तुम रखते तो हम भी दौड़ कर आते,
कोई मुश्किल खड़ी रहती,सभी कुछ छोड़ कर आते,
मगर बोली तुम्हारी......तल्खियत से चूर रहती है,
बताओ किसकी खातिर रस्म सारी तोड़ कर आते??
उर्मिला माधव ...
१३.९.२०१३

ईद मुबारक

दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो उसे वो दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो की गई है दिल से वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......use wo deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo kii gaii hai dil se.......wo tanqiid mubaaraq...
उर्मिला माधव....

हरजाई

जिसे देखो वही हरजाई लगता है हमें अक्सर, हज़ारों रंग दुनियां के,दिखाएं हम तुम्हें क्या-क्या,
उर्मिला माधव

पहली कड़ी है

अभी इतिहास के पिछले सुफहे पूरे नहीं भूले,
नई एक इब्तेदा की आज फिर पहली कड़ी है,
ज़रूरत क्या कसौटी पर अकेले हम खरे उतरें,
करें क्यों मश्क आख़िर ज़िन्दगी कितनी बड़ी है ?
उर्मिला माधव,
13.9.2016

पूरी जाति का

बस यही तो भेद है मानव की पूरी जाति का
अनुकरण करता रहा है व्यर्थ झूठी ख्याति का
भावना जो व्यक्त करदे वो कहाँ वाणी निकृष्ट??
स्वयं ही करता विभाजन धर्म और प्रजाति का
उर्मिला माधव...
13.9.2016

तक़लीफ़

तक़लीफ़ ज़िंदगी में बहुत दूर तक चली,
खुशियों ने डर के हमसे मुलाक़ात ही न की..
उर्मिला माधव,
13.9.2017

Tuesday, 11 September 2018

तर्जुमा है

इक हुजूमे सानिहा जिसमें निहां है,
ज़िंदगी ....जद्दोज़हद का तर्जुमा है.
#उर्मिलामाधव
12.9.2015

बढ़ाएं हम

Taqaaza waqt ka hai ye ki ab n dagmagaayen hum,
Irada karke nikle hain,kabhi n mud ke aayen hum,
Agarche,teergi,toofaan,muqabil kuchh bhi aa jaaye,
Bahut shiddat se apna hausla khud hi badhaayen hum......
Urmila Madhav
12.9.2013...

दोहा

हम शिव कहकर शव हुए और तुम अंतर्ध्यान,
घर बाहर सब एकसा ...मन जब हुआ मसान....
#उर्मिलामाधव
12.9.2015

Monday, 10 September 2018

फ़िक़्र करते हैं

जो सियासत का ज़िक्र करते हैं,
बे-सबब इतनी फ़िक्र करते हैं ...
उर्मिला माधव ...
११.०.२०१३...

चैन क्या है

दिल,जिगर,दामन,गरेबाँ,चाक सब,
अब समझना है हमें ये चैन क्या है ?
::::::;;
Dil,jigar,daaman,garebaa'N chaak sab,
Ab samajhna hai hamen ye chain kya hai ?
उर्मिला माधव...
11.9.2016

हारे हुए हैं

वो समझते हैं कि हम हारे हुए है,
हम निगाह-ए-शौक़ के मारे हुए हैं,
उर्मिला माधव

रिआया

मेरे जितने दोस्त थे सब हो गए आलमपनाह,
हम रिआया हैं न उनके दोस्तों में अब शुमार,
उर्मिला माधव,
11.9.2017

सन्नाटा है

चंडूख़ाने की दीवार गिरानी पड़ सकती है,
दीवारों के पार अजब सा.........सन्नाटा है...
उर्मिला माधव,
11.9.2017

फिरता है

कितने सारे। ...दर्द समेटे फिरता है,
दिल में आहें। ..सर्द समेटे फिरता है,
जब चाहे तब दुनियां अपनी रच डाले
बेमतलब की। ..गर्द समेटे फिरता है
उर्मिला माधव

नासाज़ नज़र आते हो

दुनियां से नाराज़ नज़र क्यों आते हो ?
झगड़े का आग़ाज़ नज़र क्यों आते हो ?
सब खुशियां तो हासिल तुमको रहती हैं,
बे मतलब नासाज़ नज़र क्यों आते हो ?
उर्मिला माधव।।

Saturday, 8 September 2018

तहरीर का हम

क्यूँ करें शिकवा तेरी तहरीर का हम,
जानते हैं फैसला तकदीर का हम ...
सांप हमने पाल् के रख्खे है घर में,
जानते हैं हौसला हर तीर का हम ....
उर्मिला माधव
९.९.२०१३

आइंदा नहीं

उम्र से ज़्यादः कोई जिंदा नहीं,
चार पल है सिर्फ़,आइन्दा नहीं,
बेहयाई ओढ़ के बैठा हुआ जो,
गलतियां करके भी शर्मिंदा नहीं....
उर्मिला माधव...
9.9.2014...

सब्र लगता है

सब ज़माना ये क़ब्र लगता है,
चूँकि जीना ही ज़ब्र लगता है,
ख़ुद को इंसान भी जताने में,
उम्र लगती है...सब्र लगता है,
उर्मिला माधव..
9.9.2015

बात की

ख़ुद को देखा,ख़ुद को जाना,और ख़ुद से बात की,
क़द्र क्या फिर ख़ाक होगी .....ग़ैर के जज़्बात की ?
उर्मिला माधव,
9.9.2016

Friday, 7 September 2018

बात और है

है जब तलक ये ज़िन्दगी तो भाग दौड़ है,
थम जाए अगर सांस तो फ़िर बात और है,
उर्मिला माधव...
8.9.2015

प्यार समझना

तुम जीत भी जाओ तो उसे.....हार समझना,
बे-मौक़ा वाह-वाह को.........बेकार समझना,
शेर-ओ-सुखन के हुस्न को जीता न कोई भी,
तारीफ़ की आवाज़ों को...बस प्यार समझना,
#उर्मिलामाधव
8.9.2015

छोड़ना पड़ा

दिल अपना हमको ज़ोर-ओ-ज़बर तोड़ना पड़ा,
मुंह तुझसे हमको ...अहले नज़र, मोड़ना पड़ा
हर रोज़ मर रहे थे ......बहोत सोच -सोच कर,
चाहत को अपनी .वक़्त-ए-सफ़र छोड़ना पड़ा,
उर्मिला माधव..
8.9.2016

बने रहिये

jaane kab ...raasta badal jaaye,
aap bas ham safar bane rahiye,
umr bhar ...sath kiska rahta hai,
aap bas ..mukhtsar bane rahiye....
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जाने कब ....रास्ता बदल जाए,
आप बस .हमसफ़र बने रहिये,
उम्र भर साथ किसका रहता है,
चाहे फिर...मुख़्तसर बने रहिये....
उर्मिला माधव....
8.9.2016

Thursday, 6 September 2018

शोर

मेरी तनहाई का मुझमें शोर ज़ियादा है बहुत,
इसीलिए बाहर का कोई शोर नहीं सुन पाती हूँ,.....
उर्मिला माधव...
7.9.2014..

औलिया के घर गए

उम्र भर यूँ ही क़दम ज़ाया किये,
एक दिन बस औलिया के घर गए,
उर्मिला माधव
7.9.2015

मनाने आए हैं

नींद गर आ जाए तो फ़िर कौन आता है अभी,
हम तो अपनी नींद का मातम मनाने आए हैं
उर्मिला माधव

चाय पर

देखिए अब जा रहे हैं, सोएंगे हर हाल में,
पांच बजकर तीस पर उठना पड़ेगा चाय पर,
उर्मिला माधव

मियां

एक तबक़ा जो मुहब्बत क़ौम पर ख़ारिज़ करे,
इस तरह से बे-गुनाही कैसे साबित हो मियाँ 
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ek tabqaa jo muhabbat qaum par khaariz kare,
iss tarah se be- gunaahii kaun phir saabit kare...
उर्मिला माधव....

सबके वास्ते

पाक़ रूहें देखती हैं हर किसी को एक सा
जैसे कबिरा मांगता था ख़ैर..सबके वास्ते...
उर्मिला माधव ..
6.9.2016

लुकमान

आपको घेरे रहे ता उम्र ही बहम-ओ-सराब,
ऐसी तबियत के लिए लुकमान भी बेकार थे...
6.9.2016

Tuesday, 4 September 2018

क्या मानी

अहले चमन रोज़ तरसते थे एक कतरे को,
वक़्त गुज़रे पे बरसने के भला क्या मानी ??
उर्मिला माधव..
५.९.२०१३

हो सकेगा

साज़ कोई सोज़ के कैसे मुकाबिल हो सकेगा, !
जो तड़पना ही न जाने,वो कहाँ दिल हो सकेगा !
उर्मिला माधव...
5.9.2016

उठते रहते हैं

कभी बेवक़्त आंधी से ....हरे पत्ते भी गिरते हैं,
वहीँ कुछ ख़ुश्क पत्तों के,बवंडर उठते रहते है.
उर्मिला माधव..
5.9.2016

उच्छ्रंखल

नदिया की धारा उच्छ्रंखल,
सागर धीर सिखाता है,
पृथ्वी के सब वृक्ष धरोहर,
पथिक जहां रुक जाता है..
उर्मिला माधव

रब के लिए

सोचता कौन है अब,रब के लिए,
मरते रहते हैं सब लक़ब के लिए,
उर्मिला माधव

Monday, 3 September 2018

मरता है

दिल भी दोहरे कमाल करता है,
जिससे जीता है,उसपे मरता है....
उर्मिला माधव...
4.9.2015

ज़माने वाले

थक के रो जाते हैं .....किरदार निभाने वाले,
इस क़दर दाग़ लगाते हैं .........ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने ..........नहीं होते सुनाने वाले....
उर्मिला माधव...
4.9.2015...

रंग में हैं

हम अकेले ख़ास अपने रंग में हैं,
यूं बज़ाहिर आप सबके संग में हैं....
उर्मिला माधव..
4.9.2017

Sunday, 2 September 2018

ग़म गुसारी

ज़िन्दगी करती न हरगिज़ ग़म गुसारी,
एक दिन हलका तो एक दिन ख़ूब भारी
उर्मिला माधव

वक़्त का किरदार है

गुल बनेंगी एक दिन कलियां सभी,
फिर तो बाक़ी, वक़्त का किरदार है..
उर्मिला माधव...
3.9.2017

Saturday, 1 September 2018

मुझको मिरी ख़बर है

रिश्तों में दम नहीं है तन्हाई पुर असर है,
कितना सुकून है,बस,मुझको मिरी खबर है....
उर्मिला माधव

दर भला हो जाएगा

ज़ख़्म ग़र ये ..बरमला हो जायेगा,
बस ख़ुदा का दर भला हो जायेगा,
ज़लज़ले ....रफ़्तार पर आ जायेंगे,
हर नफ़स एक .कर्बला हो जाएगा..
उर्मिला माधव..
2.9.2017
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Zakhm gar ye barmala ho jayega,
Bas khuda ka ghar bhala ho jayega,
Zalzale raftaar .....main aa jayenge
Har nafas ek karbalaa ho jaayegaa..
Urmila Madhav

जलने का कीजै

दिल पथ्थर से,अक्सर टकरा जाता होगा,
कभी तजुर्बा,शबनम से जलने का कीजै...
उर्मिला माधव,
2.9.2017

दर्द का आलम रहा

मेरे घर में एक दिन जब ..........दर्द का आलम रहा,
आने-जाने वालों का इक...... ख़ास तबक़ा कम रहा,
चश्म-ए-गिरयां एक तरफ़ कर,बस यही सोचा फ़क़त,
अब से मैं तनहा चलूँगी,....... ग़र चे दम में दम रहा….
उर्मिला माधव,
2.9.2017