कभी ऐसे ग़मों से भी ......जिगर दो चार होता है, अकेले हम हैं और अपना दिल-ए-बीमार होता है, अगर हंसने का मौसम हो ज़माना साथ हंस देगा, नहीं मुश्किल के लम्हों में कोई ग़म ख़्वार होता है... उर्मिला माधव... 31.5.2015
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