थक के रो जाते हैं.....किरदार निभाने वाले, इस क़दर .........दाग़ लगाते हैं,ज़माने वाले, करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी, सारे अफ़साने...........नहीं होते सुनाने वाले... उर्मिला माधव.. डायरी से ...
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