जिसको चस्का हो शराब-ए-वस्ल का, वो मज़ा क्या पाएगा दरअस्ल का कितनी शिद्दत है किसीकी चाह में इम्तिहाँ है आदमी की नस्ल का।.. उर्मिला माधव 6.5.2013..
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