Friday, 18 May 2018

लहू रिसने तक

ज़ब्त करते हैं ........लहू रिसने तक,
और झुकते हैं ......जबीं घिसने तक,
हमने जब दैर-ओ-हरम समझी ज़मीं,
आह भरते हैं ......बहुत पिसने तक ....
#उर्मिलामाधव...
19.5.2015

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