ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 25 May 2018
ज़माने की
वाह क्या रस्म है ज़माने की !!
लफ्ज़ बा लफ़्ज़ आज़माने की !!
उर्मिला माधव..
26.5.2013
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