सबकी ग़ैरत सो गई है......क्या करूँ ? रूह तक जब रो गई है......क्या करूँ? दिल नहीं गिनता है अब ऐब-ओ-हुनर, ज़िद सी इसको हो गई है....क्या करूँ? उर्मिला माधव.... 30.5.2016
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