राबिते जब इक किनारे कर दिए, ठोकरों पर सब इशारे कर दिए,
कौन कब आया-गया ये क्या ग़रज़, सब जुदा ....हमने हमारे कर दिए, उर्मिला माधव... 30.5.2015
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