अब रास्ते हमारे आसान हो गए है,
हर बात हर बला से अंजान हो गए,
रोया किये शबो-ओ-शब जिन हसरतों की ख़ातिर,
कुछ यक़-ब-यक़ लगा हम नादान हो गए हैं,
ता ज़िंदग़ी सम्हाला,जिन चाहतों को हमने,
सब सिलसिले वहाँ के वीरान हो गए हैं,
पर ये ज़माने वाले जाने क्यूँ हँस रहे हैं,
मेरी नज़र में ये सब बे-ईमान होगए हैं।। उर्मिला माधव.
9.3.2013
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