Saturday, 19 May 2018

लहू लिखती रहीं

क्यूँ दिल-ए-बिस्मिल का किस्सा हम कभी कहते कहीं,
बस हमारी उँगलियाँ .........कसदन लहू लिखती रहीं ...
उर्मिला माधव...
20.5.2015..

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