जब प्रीत नहीं पहचानोगे तो रीत कहाँ से जानोगे? जब ह्रदय में झन्कार नहीं,संगीत कहाँ पहचानोगे? जब भावों का संसार नहीं तुम गीत कहाँ पहचानोगे? जब अंतर्मन में पीर नहीं,मन मीत कहाँ पहचानोगे? उर्मिला माधव.....
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