ज़िन्दगी,ज़िन्दादिली बस नेमतों का हर्फ़ है, है बुलन्दी एक जैसी, नाम भर का फ़र्क़ है, भूल जाए ज़िन्दगी को जो इसे रुसवा करे, ऐसी रुसवाई के मानी तो ज़रेब-ए-ज़र्फ़है .... उर्मिला माधव.. 27.2.2013
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