Wednesday, 13 February 2019

तरक़ीब है

इक बहाना मिल गया बस ठीक है,
इसमें जीने की बहुत तरक़ीब है,
चंद लमहों के लिये हम सो गए,
ये महज़ इक ख़्वाब की तस्दीक़ है,
उर्मिला माधव

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