अब मुहब्बत हो....या अदावत हो, चाहे हिजरत हो ....या बग़ावत हो, जो भी होना था हो लिया अबतक, बस के अब ..हश्र की इजाज़त हो, उर्मिला माधव... 18.2.2017
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