Saturday, 16 February 2019

ज़िंदगानी के

हमारे इम्तिहां कब तक हैं वो तारीख़ बतला दो,
बहुत पर्चे कड़े रख्खे हैं तुमने ......ज़िंदगानी के,
उर्मिला माधव
17.2.2015

No comments:

Post a Comment