अगर दूरी मुआफ़िक है तो दूरी बरमला करदे, भला फिर रंज-ओ-ग़म कैसा सभी कुछ बेमज़ा करदे,
दर-ओ-दीवार की सीलन,वहीँ कुछ झांकती शाखें, सही क्या है इमारत पर ज़रा कुछ तब्सरा करदे, उर्मिला माधव.. 20.2.2017
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