Tuesday, 5 February 2019

संभाल रख्खा है

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
दर्द ....कांधे पे डाल रख्खा है,

ग़म सभी ज़िन्दगी में पिनहां हैं,
क्या कहीं अर्ज़-ए-हाल रख्खा है?
उर्मिला माधव,

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