दो शेर अलग-अलग..
ढूंढ कर दिखलाइये अब सुर्ख़ रंगों की चमक, इक सफ़ेदी है यहां, फिर दूर तक कुछ भी नहीं
एक ग़म से टूट कर फिर उठ नहीं पाए कभी, उम्र भर कोशिश रही,दुनियां को हम भी देखते.. उर्मिला माधव, 13.2.2014
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