हैलो-हैलो क्यों करो.....आकर मियाँ, है कोई रिश्ता नहीं जब......दरमियाँ, बे-वज्ह ही चल दिए......गुफ्तार को, जाओ तुम अपना संभालो घर मियाँ उर्मिला माधव... 19.2.2014.
No comments:
Post a Comment