Wednesday, 28 February 2018

बहरूपिये से होगए

सियासत के नाम...
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सब के सब बहरूपिये से हो गए,
चंद सिक्कों की ख़नक में,खो गए,
दर्द की आवाज़ आख़िर क्यों सुनें ?
कान में उँगली घुसा कर सो गए....
उर्मिला माधव...
१.3.२०१४ ...

हो तो सही

क्यों गुज़ारिश करूँ समंदर से,
तिश्नगी, तिश्नगी सी हो तो सही....
उर्मिला माधव...
1.3.2016

🤔🤔🤔🤔🤔

हर एक शख़्स यहाँ ख़ुद-ब-ख़ुद में आकिल है,
तो फिर वो कौन हुए,...जिनको बेवकूफ़ कहा ?
🤔🤔🤔🤔🤔
Har ek shakhs  yahan,khud-b-khud men aaqil hai,
To Phir wo kaun hue, jinko bewakuf kahaa?
उर्मिला माधव,
1.3.2017

ब्रिज में शेर

ईसा,मूसा,राम मोहम्मद,और कृष्ण की माई हूँ,
माता है केँ इन संतन की,जग में चों मुरझाई हूँ...
उर्मिला माधव..
1.3.2017

Monday, 26 February 2018

ज़र्फ़ है

ज़िन्दगी,ज़िन्दादिली बस नेमतों का हर्फ़ है,
है बुलन्दी एक जैसी, नाम भर का फ़र्क है,
भूल जाए ज़िन्दगी को जो इसे रुसवा करे,
ऐसी रुसवाई के मानी तो ज़रेब-ए-ज़र्फ़ है ।...
.उर्मिला माधव..
27.2.2013

सफ़ीना है

"आँसू से भरी हैं ये आँखें,ज़ख़्मों से भरा ये सीना है,
बरपा है क़हर तक़लीफों का,आया होठों पै पसीनाहै,
हर ज़ख़्म लहू जब देता है,मजबूर नज़र चकराती है,
तू शान-ए-क़रीमी रख अपनी तूफाँ में आज सफीना है।।
उर्मिला माधव...
27.2.2014

मित्र मिले

मिली दृष्टि तब मित्र हमारे,आशा से अतिरिक्त मिले,
दृष्टि घुमाई ज्यों ही हमने,...ह्रदय प्रेम से रिक्त मिले,
उर्मिला माधव...
26.2.2015...

करिश्मा साज़

मुझको ये लग रहा है,कहीं आस-पास हो,
कैसे करिश्मा साज़ हो,.परवर दिगार तुम?
उर्मिला माधव,
27.2.2017

Sunday, 25 February 2018

शिकायत हो गई है अब

उन्हें हमसे मुहब्बत में शिकायत होगई है अब,
कि पैग़ाम-ए-मसर्रत में किफ़ायत होगई है अब,
ज़रूरी तो नहीं अब तक वो हमको याद ही रक्खें
निगाह-ए- ग़ैर की उन पर इनायत होगई है अब।...उर्मिला माधव.
26.2.2013

देख लेते हैं

उफ़ ये पुरज़ोर, हवाएं,ये आंधियां, ये चराग़,
ज़िंदगी किसकी मुक़म्मल है,....देख लेते हैं,
उर्मिला माधव,
26.2.2017

Saturday, 24 February 2018

क्यूँ है

<3 <3
बारिश तो हो रही है सावन उदास क्यूँ है?
तनहाइयों का आलम ही आसपास क्यूँ है?
काली घटा के साये घिर-घिर के आ रुहे हैं,
अब तेरी मुहब्बत का ऐसा लिबास क्यूं है?.....उर्मिला माधव
25.2.2013

बिसात रखलूँ

इंसाँ की ज़िन्दगी भी हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ

insaan ki zindagi bhi hae ghaam imtihaan hai,
taufiiq mujhko dede,aab-e-hayaat rakh loon,
kaisii bhi rahghuzar ho raftaar ho muqammal,
mahfil main aalimon kii apni bisaat rakh loon ....
उर्मिला माधव
3.7.2013

ग़म गुसारी

ज़िंदगी ....करती न हरगिज़ ग़म गुसारी,
एक दिन हलका तो इक दिन ख़ूब भारी..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

आ गए हैं हम

मुश्किल ऑ हादिसात से घबरा गए हैं हम,
ये कौनसा जहाँ है,....कहाँ आ गए हैं हम?
उर्मिला माधव,
24.2.2017

Friday, 23 February 2018

मुक्तक

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक जगत के आपको शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ....विश्व में महिमा अपार,
हो नमन स्वीकार मेरा ...आपको शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

Thursday, 22 February 2018

झुक नहीं सकी

ये ऐसी जुस्तजू है कभी रुक नहीं सकी,
लेकिन किसीके रू-ब-रू ये झुक नहीं सकी,
कहते हैं जिसको इश्क़ दिमाग़ी फ़ितूर है,
फ़िर भी ये दिल की राह में आता ज़रूर है ....
उर्मिला माधव..
23.2.2013

Hindi nazm

ye jivan to parivartan hai,thahraav kahin kaise hoga??
jyon boond jama ho jati hain parivartit hotin sagar main,
sagar main jhanjhaawat utehn jab lahren parivartit hotin,
prakriti niyati parivartan hai,
main iske sath chalun kaise?
algaav sabhi se nishchit hai,
is man ko vritha chhalun kaise?.....
Urmila Madhav.
23.2.2013.

शेर

आँखें मेरी थक गई हैं,सर बहुत दुखने लगा,
नींद से कहना ज़रासा,इस तरफ़ भी आएगी,
23.2.2018

Wednesday, 21 February 2018

पाबंदियों के साथ

दर हकीक़त वक़्त भी पाबंदियों के साथ है,
दिन हुआ दिन में हमेशा,रात में ही रात है,
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

हुस्न-ओ-इश्क़ लिखते हैं

लोग जो हुस्न-ओ-इश्क़ लिखते हैं,
मुझको.......दीवाने जैसे दिखते हैं,
सिर्फ़..........शाखें बदलते रहते हैं,
पाँव उनके.........कहीं न टिकते हैं.
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

शख़्स जब उतर जाए

दिल से हर शख्स जब उतर जाए
राबिता ......दरमियां बिखर जाए,
हक़ बुलंदी है ......सिर्फ़ ख़ामोशी,
बस .....किसी ग़ैर के न घर जाए...
उर्मिला माधव,
22.2.2016

Tuesday, 20 February 2018

शेर

सब्र बिलकुल थक चुका हो,जिस्म-ओ-जां बीमार हो
दिल भी बुझकर ख़ाक हो,तो चारागर भी क्या करे.....
उर्मिला माधव...
21.2.2016

Monday, 19 February 2018

कहलाइये

dard ho dil main agar to zor se chillaiye,
bewafayi dost ki her ek ko batlaaiye,
yaar ki galiyon main seedhe munh khade hojaaiye,
fakhr se phir aashiqon ki nasl ke kahlaaiye... Urmila Madhav...
20.2.2013

काफ़ी है

झुण्ड बस गीदड़ों का होता है,
शेर की ..एक दहाड़ काफ़ी है....
उर्मिला माधव...
20.2.2015..

गम नहीं करते

बड़े ठसके से यूँ बोले.......मुहब्बत हम नहीं करते,
तो हमने कह दिया जाओ,मियाँ हम गम नहीं करते,
उर्मिला माधव...
20.2.2016

सब परिधियां

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

Saturday, 17 February 2018

दस्तार में

जितने ज़्यादह पेच रख्खोगे मियाँ ....दस्तार में,
उतना ज्यादह ख़ुश्क लहजा आएगा गुफ्तार में...
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jitne zydah pench rakhkhoge miyaan dastaar main,
utnaa zydah khushq lahjaa aayegaa....guftaar main...
Urmila Madhav...18.2.2017...

इजाज़त हो

अब मुहब्बत हो....या अदावत हो,
चाहे हिजरत हो ....या बग़ावत हो,
जो भी होना था हो लिया अबतक,
बस के अब ..हश्र की इजाज़त हो,
उर्मिला माधव...
18.2.2017

Friday, 16 February 2018

पर्चे कड़े

हमारे इम्तिहां कब तक हैं वो तारीख़ बतला दो,
बहुत पर्चे कड़े रख्खे हैं तुमने ......ज़िंदगानी के,
#उर्मिला माधव
17.2.20158

औलाद

बड़े इक घर बना पाते हैं,पूरी ज़िंदग़ी देकर,
मगर औलाद ईंटों के भी टुकड़े बाँट लेती है....
उर्मिला माधव।।।
Bade ik ghar bana paate hain poori zindagi dekar,
Magar aulad। iinton ke bhi tukde baant leti hai....
Urmila Madhav
17.2.2016.

Feeling naughty

जाने क्या-क्या कह गए लाला लल्लू लाल,
कुछ दिन मस्ती में कटे,ग़म में हैं फिलहाल,
उर्मिला माधव
17.2.2016

पुरवाईयां

ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ,
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ,
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ.......... शह्र की पुरवाइयां..।
#उर्मिलामाधव..
17.2.2016

दरकार है हुस्नो शबाब

अय मियाँ क्यूँ घिस रहे हो,बेवज्ह अपनी कलम,
शाइरी के वास्ते,दरकार है ......हुस्न-ओ-शबाब,
उर्मिला माधव
17.2.2017

कै टके उठते हैं

कै टके उठते हैं दुनियां में तुम्हारी नज़्म के,
ये बताओ,कौनसा मेकअप लगाते हो मियाँ?
😊
उर्मिला माधव
17.2.2015

Thursday, 15 February 2018

ख़ास दौलत

ये बिलकुल ख़ास दौलत है जो मैंने साथ रख्खी है,
इलावा इसके कुल दुनियां ..यूँ ही बेबात रख्खी है.....
#उर्मिला माधव...
16.2.2015...

रास्ते नीचे को हैं

हर बुलंदी के सफ़र को हाशिये पर देखना,
क्यूंकि उसके बाद सारे रास्ते नीचे को हैं ....
#उर्मिला माधव..
16.2.2015...

ज़माना यूँ भी कहता है

हर इक इंसां का रब राखा,ज़माना यूँ भी कहता है,
भरोसा कर नहीं पाता, मुसलसल ग़म जो सहता है....
उर्मिला माधव...
16.2.2015...

Wednesday, 14 February 2018

रंजिशें तमाम

उम्र भर करती रही .मैं रंजिशें तमाम,
कुछ दोस्तों ने रंगे,मुरव्वत मिटा दिया...
#उर्मिला माधव
15.2.2015...

Tuesday, 13 February 2018

तशहीर करूं

इस दर्द को क्या तशहीर करूँ,
किस मुंह से कोई तक़रीर करूँ,
ये अब तक है तनक़ीह तलब,
किस लमहे को ज़ंजीर करूँ??
उर्मिला माधव...
14.2.2016

Monday, 12 February 2018

Jaan honi chahiye

chaahe jitni ho muhabbat kya karen
ye samajh to .........aap honi chahiye
Sirf jazbe se ...nahin hota hai kuchh,
jism main kuchh ..jaan honi chahiye
Urmila Madhav..
13.2.2013

घबरा गए

आँख में आंसू ......हमारे आ गए,
आज जब चलने में हम घबरा गए,
उर्मिला माधव,
13.2.2017

Friday, 9 February 2018

राबिता क़ता है

पूरी दुनियां ही ........एक रस्ता है,
तुझको फ़िर मुझसे राबिता क्या है......
#उर्मिला
10.२.2015

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी थक के रुक गई होगी,
लोग समझे के मौत आ पहुंची...
#उर्मिला
10.२.2015

Thursday, 8 February 2018

मंत्रणा है

प्रेम भी एक मृत्यु जैसी यंत्रणा है,
भावना की और ह्रदय की मंत्रणा है...
उर्मिला माधव...
9.2.2014

सनमख़ाने कहाँ

ज़िंदगी जिसमें बहुत देर रुका करती थी,
वो सनमख़ाने कहाँ और वो हिसार कहाँ,
उर्मिला माधव,
9.2.2017.

ईमान तौला आपका

दिल ने एक दिन बाख़ुदा ईमान तौला आपका,
उम्र भर ..अफ़सुर्दगी का बार हम ढोया किये..
उर्मिला माधव...
::::
dil ne ek din bakhudaa ....iiman taula aapka,
Umr bhar afsurdagi ka baar ham dhoya kiye,....
Urmila Madhav
21.10.2017

दुश्मन खड़ा करते हैं हम

आशिक़ी की शक़्ल में ....दुश्मन खड़ा करते हैं हम,
ख़ुद को छोटा करके उसका क़द बड़ा करते हैं हम,
जिसकी चाहत में मुक़ाबिल ...रंजो ग़म का बोझ हो,
सारी दुनियां भूल कर,....ख़ुद से लड़ा करते हैं हम..
उर्मिला माधव,
24.10.2017

Wednesday, 7 February 2018

शेर

नसीहत है शरीयत की,हमेशा होश में रहना,
तबीयत ये मुहब्बत की हमेशा जोश में रहना....
उर्मिला माधव...
8.2.2014..

मग़रूर जैसे

लोग कुछ मगरूर जैसे लग रहे थे,
खुद ही खुद में,चूर जैसे लग रहे थे
वो बहुत मीठी ज़बां सब बोलते थे,
थे वहीँ.....पर दूर जैसे लग रहे थे,
उर्मिला माधव...
8.2.2014..

लब्बे लुवाब देखेंगे

नींद आई तो ख़्वाब देखेंगे,
जोड़ बाक़ी,हिसाब देखेंगे
कैसे ख़ुद पै हंसे कहाँ रोये,
दिन का लब्बे लुवाब देखेंगे....
#उर्मिला
8.2.2015...

Tuesday, 6 February 2018

मना हो गई

हद से ज़्यादा खुदा की..अना हो गयी,
मेरे हाथों की मेंहदी......फना हो गयी,
नाम जिसका लिखा था जबीं पर मेरी,
उम्र भर को वो बिंदिया..मना हो गयी....
उर्मिला माधव...
7.2.2014

न काम कर सका

दिल में उतर सका न जिगर में उतर सका,
ये तीर-ए-नीमक़श न कोई काम कर सका ....उर्मिला माधव..
7.2.2013

सहम कर ख़ामोश

सब सहम कर होगए,खामोश क्यूँ??
अब नहीं आता किसीको जोश क्यूँ??
वो कहाँ हैं जो अभी तक...साथ थे??
कुछ बताओ हो गये गुम होश क्यूँ ??
उर्मिला माधव...
7.2.2014...

छांटे हैं

हमने ख़त में,गुलाब भेजा था,
हंसके बोले कि,इसमें कांटे हैं,
हमने तो फूल रख के भेजा था,
तुमने कांटे कहाँ से छांटे हैं ???
उर्मिला माधव...
7.2.2014...

ज़िंदा जले

क्या अजब आतिश क़दा थे ज़िन्दगी के मरहले,
आग सा अहसास था  और उम्र भर ज़िंदा  जले....
उर्मिला माधव...
7.2.2014...

कुंडलिया छंद

कुण्डलिया छंद....

क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग...
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
7.2.2016

नूर-ए-हिंदुस्तान

ग़ैर मुल्क में चर्चे इसके ....नूर-ए-हिन्दुस्तान हुई,
लाशों के अंबार पै बैठी ....दिल्ली क़ब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से ..परचम भी लहराता है,
किसे ख़बर है,इसके पीछे,किसकी जां क़ुर्बान हुई...
उर्मिला माधव
7.2.2015..

Sunday, 4 February 2018

शामिल है

कैसी ख़ुशियाँ हैं जहाँ बेबसी भी शामिल है,
बहुत से अश्क़ हैं थोड़ी हँसी भी हासिल है,
हम जिसकी चाह में नींदें ख़राब करते हैं,
ये झूठे ख़्वाब ही तो ज़िंदगी के क़ातिल हैं ।  उर्मिला माधव..
5.2.2013

शादमां समझा किये

लोग खुद को ....शादमां समझा किये,
गो कि मुस्तक़बिल से सब अनजान थे,
#उर्मिला
5.२.2015....

Saturday, 3 February 2018

मौसम हो तो ऐसा हो

जमादे रंग बस अपना...कि मौसम हो तो ऐसा हो,
हकीक़त भी लगे सपना कि मौसम हो तो ऐसा हो,
नज़र की हद तलक तो है....वसंती रंग की दुनियां,
न हो खुर्शीद में तपना....कि मौसम हो तो ऐसा हो....
उर्मिला माधव...
4.2.2014....

जोड़े ऑ तोड़े

तितलियों के पंख तोड़े,.......फूल के डंठल निचोड़े,
कौन प्रिय कहकर तुम्हें,एक दीर्घ सी निःश्वास छोड़े,

सत्य की पहचान हो तो कोई भी मुंह मोड़ लेगा,
है भला एकांत तो फिर क्यों अधिक जोड़े ऑ तोड़े...
#उर्मिला
4.2.2015....

करते ही नहीं

हम नज़र से देख कर भी वाह करते ही नहीं,
बेवफ़ा, बेशक़ रहो हम आह भरते ही नहीं,
पास आओ दूर जाओ ये मशक़्क़त तुम करो,
हम मुहब्बत की तुम्हारी चाह करते ही नहीं ...
#उर्मिलामाधव..
4.2.2016

शायद

ज़ख़्म गिनती में .....चार लगते थे,
ये भी दुनियां ही गिन सकी शायद...
उर्मिला माधव ..
4.2.2017

Friday, 2 February 2018

न तो ये ज़मीन वाले

न तो ये ज़मीन वाले,ना ही आसमान वाले,
हरग़िज न समझे कोई,कितना भी आज़माले,
हम मर गए जहाँ में,क्या कोई जान पाया?
तो दिल ये उठके बोला,अब ख़ुद क़फ़न उठाले,
ये जो मौत की है मन्ज़िल,ना होश खोने पाए,
ये तेरा जनाज़ा है काँधा भी ख़ुद लगाले  ।।      Urmila Madhav.
03,02,2013

शेर

जितना आसां हैं ..ख़ुदकुशी लिखना,
उतना मुश्किल है इक ख़ुशी लिखना..
#उर्मिला
3.2.2015..

क़ता....आदमी की नस्ल का

जिसको चस्का हो शराब-ए-वस्ल का,
वो मज़ा क्या पाएगा दरअस्ल का,
कितनी शिद्दत है किसीकी चाह में
इम्तिहाँ हो आदमी की नस्ल का ।।
उर्मिला माधव......
3.2.2016

ज़ंजीरे पा लगती रही

उम्र भर चलते रहे बस यूँ मेरे तनहा क़दम,
रहनुमाई भीड़ की ज़न्जीरे पा लगती रही। ...
उर्मिला माधव। ...
3 .2 .2017

गंगा

कौन था,किसने किया,गंगा को यूँ फर्शी सलाम,
ऐसा क्या सजदा किया जो फिर नहीं उठ्ठा कभी...
उर्मिला माधव। ....
3 .2 .2017

Thursday, 1 February 2018

पथ्थर उठाए थे बहुत

मैं ही अपना सर छुपा कर उम्र भर बचती रही,
वरना मुझ पर आपने पथ्थर उठाये थे बहुत...
::
Main hii apna sar chhupaa kar umr bhar bachti rahii,
Warna mujh par aapne,paththar uthaaye the bahut...
#उर्मिलामाधव..
2.2.2016

ग़म बहोत

जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
::::
Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
उर्मिला माधव
27.1.2016