कोई ऐसा भी तो होगा जिसकी दुनियां मिट गई, उसकी आहों की कराहट कौन समझेगा भला, क्या है घर में क्या नहीं है, उम्र भर का दर्द है, ऐसे मुस्तक़बिल की आहट, कौन समझेगा भला... उर्मिला माधव
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