ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 6 May 2019
क्यूं समझे
मैंने इक बात कही थी कि इसे तू समझे,
तू मगर ज़िद पे रहा, तू ही इसे क्यूं समझे,
उर्मिला माधव
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment