Friday, 17 May 2019

एहतराम से

आ-जा रही है साँस बड़े एहतराम से,
ये बे-अदब ज़रा भी हुई,गए काम से,
इसके बग़ैर होगए जन्नत नशीं सभी,
सब जानते हैं इसको अक़ीदत के नाम से,
उर्मिला माधव..
18.5.2013

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