आ-जा रही है साँस बड़े एहतराम से, ये बे-अदब ज़रा भी हुई,गए काम से, इसके बग़ैर होगए जन्नत नशीं सभी, सब जानते हैं इसको अक़ीदत के नाम से, उर्मिला माधव.. 18.5.2013
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