अब ह्रदय पाषाण जैसा हो गया है, हर तरह निष्प्राण जैसा हो गया है, सब प्रयत्नों से परे है धैर्य भी अब, जीते जी निर्वाण जैसा हो गया है.... उर्मिला माधव... 26.5.2014...
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