हम बहुत मसरूफ़ थे,मजबूर थे, आप ये बतलाइये क्यूँ दूर थे ? मुन्तज़िर थे आपके पैग़ाम के, या समझ लें आप कुछ मगरूर थे ? उर्मिला माधव... 4.5.2015..
No comments:
Post a Comment