सुर्खियाँ अख़बार की....हर रोज़ बदली जायेंगी, सोचते हैं प्रैस वाले.........कि ये पढ़ ली जायेंगी, ये समझना चाहिए......कुछ लोग ला-परवाह हैं, आएँगी ख़बरें मगर...आँखें ही ढक ली जायेंगी, उर्मिला माधव... 23.5.2014...
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