दह्र में तुझसा सखी,तुझसा न दिलबर कोई, हाथ उठाये हैं .......तेरी सम्त,हवाओं वाले, ओ हर इक पल के निगहबान मिरी दुनियां के, मेरे हक़ में भी तो कह लफ्ज़ दुआओं वाले..... #उर्मिलामाधव... 2.5.2015
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