सोच का हो जाएगा छोटा हिसार जिस्म के सब दायरे थक जाएंगे, उंगलियों पे ज़िन्दगी होगी शुमार ख़्वाब से ख़ाली रहें दो चश्म जब, तब समझना ज़िंदगी आसान है.… उर्मिला माधव 27.5.2018
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